लखनऊ की छत्तर मंज़िल में मिला २०० साल पुराना नवाबों से जुड़ा रहस्य

खोदाई के दौरान निकली नवाबों की नाव (Image:Hindustan times)
छत्तर मंज़िल  उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक इमारत है जो अवध के शासकों और उनकी पत्नियों के लिए एक महल के रूप में कार्य करती थी, इसका निर्माण नवाब गाजी उद्दीन हैदर के आदेश से हुआ था और उनके उत्तराधिकारी नवाब नासिर उद्दीन हैदर की मृत्यु के बाद पूरा हुआ। गोमती नदी के तट पर स्थित छत्तर मंज़िल में एक बड़ी छत्तर मंज़िल और एक छोटी मंज़िल शामिल है, हालाँकि अब केवल बड़ी छत्तर मंजिल ही मौजूद है। ये दो इमारतें इंडो-यूरोपियन-नवाबी स्थापत्य शैली के उदाहरण थीं । उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा इसके जीर्णोद्धार और संरक्षण के बाद इमारत में दो संग्रहालय और एक पुस्तकालय स्थापित करने की योजना बनाई है।

उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग (यूपीएसएडी) के अधिकारियों ने लखनऊ के 220 वर्षीय छत्तर मंज़िल में खुदाई के दौरान एक 42 फीट लंबे और 11 फीट चौड़े गोंडोला (एक पारंपरिक, सपाट तल वाली नाव) पाए जाने का खुलासा किया है जो कभी अवध की बेगमों (शाही महिलाओं) का  एक महल हुआ करता था।

सदियों से दफन पड़ी एक पूरी मंजिल (Image: Hindustan times)
यूपीएसएडी निदेशक एके सिंह के अनुसार  “यह नाव कैसे दफन हुई यह अभी भी एक रहस्य है। हमें अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह बाढ़ या किसी अन्य कारण से हुआ था" मई 2017 के बाद यह तीसरी बड़ी खोज है, इससे पहले अधिकारियों ने एक 15 वर्ग फुट के कमरे की खोज की थी , जो एक सेरग्लियो (महल परिसर) का निर्माण करने वाली संरचनाओं के नीचे दबे हुए थे। बाद में, उत्खनन करने वालों को एक पूरी मंजिल मिली जो सदियों से दफन पड़ी थी।
खुदाई के दौरान मिली सुरंग (Image:Hindustan times)
संरक्षण टीम में शामिल नितिन कोहली ने बताया कि छत्तर मंजिल में खुदाई के दौरान फिर उन्हें एक  सुरंग भी मिली थी, इसके बाद नाव बांधने के कुंडे भी मिल चुके हैं। अब नाव मिली है, इससे एक बात साबित हो चुकी है कि गोमती नदी की ओर निकलने वाले छत्तर मंजिल के पिछले हिस्से की ओर नाव चला करती थी।

अब तक, वे नवाबों के युग की 200 साल पुरानी संरचना के छिपे हुए भंडार को प्रकट करते हुए लगभग 19.5 फीट गहरे गए हैं। अधिकारियों ने खंभे, दीवार कोष्ठक, दरवाजे और खिड़कियां भी खोज निकाली हैं जो इस बात का संकेत देने के लिए पर्याप्त हैं कि दफन संरचना जीने के लिए थी।

लखनऊ के नवाबी ढाँचों पर किताबें लिखने वाले इतिहासकार पीसी सरकार ने इसे एक बड़ी खोज बताया है जो अवध के इतिहास के छिपे हुए अध्यायों पर प्रकाश डालेगी।

ऐतिहासिक छतर मंजिल में खुदाई के दौरान निकली नवाबों की नाव को केमिकल ट्रीटमेंट के सहारे संरक्षित कर कांच के बड़े से फ्रेम में रखा जाएगा। इसके बाद पर्यटक नवाबी दौर की इस नाव के दीदार कर सकेंगे।



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