Chapter 2: वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव


बालक का विकास अनेक कारको पर निर्भर करता है। इन कारको में दो कारक प्रमुख है: जैविक एवं सामाजिक। जैविक विकास का दायित्व माता पिता पर होता है और सामाजिक विकास का वातावरण पर निर्भर करता है।

वंशानुक्रम का अर्थ: बालक में ना केवल अपने माता-पिता के बल्कि उनके संबंधित पूर्वजों से भी अनेक शारीरिक और मानसिक गुण प्राप्त होते हैं। इसे ही हम वंशानुक्रम ,वंश परंपरा ,पैतृकता ,अनुवांशिकता आदि नामों से जानते हैं।

वंशानुक्रम का प्रभाव:

(!) शारीरिक विशेषक (Physical Quality)

इसके अंतर्गत मनुष्य का शरीर, उसके अंगो का आनुपातिक गठन, स्वास्थय, रूप रंग आदि सब आ जाते हैं। बालक के रंग रूप, आकार, शारीरिक गठन, ऊचाईं इत्यादि के निर्धारण में उसके आनुवांशिक गुणों का महत्वपूर्ण हाथ होता है। बालक के आनुवांशिक गुण उसकी वृद्धि एवं विकास को भी प्रभावित करते  हैं। प्रायः यह भी देखा जाता है की जो बालक जन्म से ही दुबले पतले, कमजोर, बीमार तथा किसी शारीरिक बाधा से पीड़ित रहते हैं, उसकी तुलना में सामान्य एवं स्वस्थ बच्चे का विकास अधिक होता है , शारीरिक कमियों का स्वास्थय ही नहीं वृद्धि एवं विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है

(२) बौद्धिक विशेषक (Intellectual Quality):

इसके अंतर्गत बालक की योग्यता, कल्पना शक्ति , विचार शक्ति एवं तर्कशक्ति, अचानक आयी किसी समस्या का तुरंत निर्णय लेकर समाधान ढूँढना आदि सब कुछ आ जाते हैं |  जिस बालक  के सीखने की गति अधिक होती है , उसका मानसिक विकास भी तीव्रता से होता है|  बालक अपने परिवार, समाज एवं विद्यालय में अपने आपको किस तरह समायोजित करता है , यह उसकी बुद्धि पर निर्भर करता है |

(३) नैतिक / चारित्रिक विशेषक (Moral Quality):
नैतिकता के तहत वो सब गुण  आ जाते हैं, जो स्वार्थ को छोड़कर दूसरों की भलाई का भी ध्यान रखते हैं| इनमे सच बोलना, हिंसा न करना, भ्रष्टाचार से दूर रहना, दूसरों पर दया करना आदि सभी गुण  आ जाते हैं|  मनोवैज्ञानिक डगडेल  ने अपने प्रयोगों के आधार पर यह बताया है की माता पिता के चरित्र का प्रभाव भी उनके बच्चे पर पड़ता है | इस तरह व्यक्ति के चरित्र में उसके वंशानुगत कारकों का प्रभाव स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है | 

वातावरण का अर्थ :
वातावरण के लिए पर्यावरण शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना परि + आवरण परि का अर्थ है चारों ओर से ,आवरण का अर्थ ढका हुआ।इस प्रकार हम पर्यावरण को यह कर सकते हैं कि जो वस्तु हमें चारों ओर से घेरे हुए है उसे हम वातावरण या पर्यावरण कहते हैं।

वातावरण का प्रभाव:
वातावरण में शामिल  प्रत्येक घटक व्यक्ति के जीवन को आरम्भ से ही प्रभावित करते हैं, और इसकी शुरुआत माँ के गर्भ से ही हो जाती है| यदि गर्भ के समय भी माँ अपने मासिक और शारीरिक स्वास्थय का ख्याल नहीं रखती हैं तो उसके बच्चे के अच्छे स्वास्थय की आशा कैसे की जा सकती है, और यदि बच्चे का स्वास्थय अच्छा ना होगा तो उसके विकास पर प्रतिकूल असर पड़ना स्वाभाविक है |

बालक के विकास पर उसके सामाजिक एवं आर्थिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है |  गरीब परिवार के बच्चों को विकास के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध हो पाते हैं, उनकी आर्थिक दुर्बलता उन्हें अच्छी शिक्षा और अच्छे परिवेश से वंचित करती है | वातावरण के कारण पड़ने वाले कुछ महत्वपूर्ण प्रभाव इस प्रकार हैं :

(१) शारीरिक संरचना: बालक की शारीरिक संरचना पर वंशानुक्रम के साथ साथ वातावरण का भी प्रभाव पड़ता  है|  उदहारण के तौर पर पहाड़ी इलाकों के लोगों का कद प्रायः मैदानी लोगों के मुक़ाबले छोटा होता है, यह अंतर वातावरण के परबजाव के कारण होता है |

(२) व्यक्तित्व विकास: कोई भी व्यक्ति उपयुक्त वातावरण में रहकर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करके आगे बढ़ सकता है और महान बन सकता है |

(३) बालक का सर्वांगीण विकास : बालक के शारीरिक , मानसिक , सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास आदि पर वातावरण का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है | 

(४) मानसिक विकास : Gordan  नामक मनोवैज्ञानिक के अनुसार  ुवहित सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण न मिलने पर मानसिक विकास की गति धीमी हो जाती है | 
Chapter 2: वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव Chapter 2: वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव Reviewed by on January 21, 2020 Rating: 5

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